20.4.15

धर्म भाई


मैं आज ये कहता हूँ 
इस मुल्क-ओ-मिल्लत से 

इस मॉल से उस मैख़ाने से
इस मेल से उस ख़ातून से

इंसान को इंसान का 
धर्म न दिखाई दे 

ख़याल यूँ है 
की फर्क रहे  

पर यूँ यक-ब-यक 
न ज़ाहिर हो 

भाई सामने 
हो खडा तो... 

दाढ़ी, पगड़ी, 
टीका, टोपी, कृपाण 
न दिखाई दे 

पासपोर्ट खुले तो 
दूसरा नाम
पहले के बाद 
तशरीफ़ लाये 

सलवार टखने 
के नीचे रहे 
और लॉकेट 
बुशर्ट के पीछे 
छुप जाये 

यूँ मानिए की 
इंसान को 
इंसान का 
मज़हब न 
दिखाई दे 

भाई सामने 
हो खडा तो 

भाई सा दिखाई दे 

भाई सा दिखाई दे 

भाई सा दिखाई दे 

13.4.15

मजाज़


हवा में उड़ता नमक लगे 
शराब सा है 
मिजाज़ शायद कुछ दिनों से 
मजाज़ सा है


मजाज़ उर्दू के बहुत बड़े शायर हैं और रहेंगे. उनका असली नाम असरार उल हक़ था 
पर तखल्लुस मजाज़ लखनवी रखा और रिश्ते में जावेद अख़्तर के मामा लगते हैं. 
अंततः अपने मिजाज़ और बेहिसाब शराब पीने वजह से 1955 में 
इस दुनिया से रुख़सत हुए.

लब्बेया


ना लब्बेया कुछ
ना ही कुछ पाया

हवाओं का रुख़ बदला
पहचान नहीं बदल पाया

रगों में दौड़ते हर कतरे को
खुद आप से अपने जलता पाया

ना लब्बेया कुछ
ना ही कुछ पाया

Jumble तरंग



तलवार हूँ 

मुर्गा मत समझ 

दोस्त हूँ 

गुलेल मत समझ


डर का घर

जंगल में घर
बसा के देखा
डर को गुफा में
जाते देखा

दुम दबा के
चिपक लिए हम भी
गुफा में बंद
हम भी और डर भी

खतरा ना अंदर आ पाया
पर सन्नाटे का शोर
मेरा दिल...
ना सुन पाया
ना सह पाया

तब खिड़की का
जन्म हुआ
तब कहीं दरवाज़े का
ख़याल आया

यूँ... ना तो घर
तेरा जंगल से
ना ही जंगल कभी
तुझसे मिल पाया

डर को अपने
घर में पाल के
क्या खोया
क्या पाया

Aansoo

Aansoo. 

Aansoo keemti hain. 

Kyonki aansoo ko koi bator ke,
samet ke, 

kisi tijori mein, 
deep freezer mein, 
ya kisi frame mein saja ke 

nahin rakh sakta. 


Unki taqdeer mein 'kho jaana' hota hai. 


Theek uss pal ki tarah 
jo guzar gaya ho. 

Aisa likhne ki wajah? 

Likhta, 
par ab 
wo pal bhi 

guzar gaya hai.

प्रोग्राम

मत पूछो आज का प्रोग्राम 
आज है सालगिरह-ए-लगाम 

on 17th feb 2015 (Suma's B'day) 


Reality DOES NOT Bite

Reality doesn't bite in Mumbai. 
It stinks. 

(just got back from Manali)

A lullaby

I wish to sleep. Like every other night.
Running past. Images. Of today. And yesterday.
My actions that broke hell. And hell that tasted sweet. 
I mind. What drives me. What makes me mad.
And mad drives that made me. What I am.
Oh yes I wish to sleep… to wish tonight.
I value. What I have. The bucket list. The must haves.
I dream. Of miracles. Hardships. And whatever it takes.
Like a fairy tale. I fail.
I celebrate. Days when I chased. In vain.
And those. When I saw it with closed eyes.
Oh yes I wish to sleep… to wish tonight.
I try. To face this. Every day.
Though easy to forget. Like yesterday.
A list of mistakes. I swear not to make.
And the ones. I make to live. Every day.
Yet. I hope. Of a better day. A better me. A better way.
Oh yes I wish to sleep… to wish tonight.

I like I want

Life. 
We like it complicated. 
But we want it simple.