25.7.14

जुम्मे रात


उस ख़ुद से अब हमारी
मुलाक़ात नहीं होती 

नशें में लिपटी

जुम्मे रात नहीं होती 

तुतलाती ज़बान में सजी हैं
जन्मदिन की बधाइयाँ
 

शायद इसीलिए
अब महफ़िल में
शराब नहीं होती