20.2.13

दादी


याद आती हैं... 

उँगलियों की हरारत
चेहरे पे झुर्रियाँ 
आँखों में शरारत

उसूलों की सख़्त थी वोह
बातों में शबद
दादी थी मेरी
इस समय से अलग.  

बाबा काम क्यों करते हो?


उनके लिए करता हूँ 
जिन के लिए हूँ 
उनके लिए भी 
जिनकी वजह से हूँ 
पर सबसे पहले उनके लिए
जिन्हें न हॊने पे भी गुमान है... 
की हूँ।