10.5.16

भोर


नशा बाहों में सिमट जाने को है

नींद भी एक करवट गुज़र जाने को है

शिकायत सिर्फ़ एक को थी और वो था चाँद

अब उसकी भी ज़िद्द मर जाने को है

खड़ा है उस पल की आँखों में आँखें गड़ाए

जो पल उसकी हस्ती मिटाने को है

क्रूर रेलगाड़ी


स्टेशन से छूटी रेल गाड़ी
दो समानांतर रेखाओं पे चलते
लोहे के बड़े बड़े पहियों ने
नहीं सुनी

एक नन्हें दिल की चीख़
रात की अधूरी जिरह
आधा कप पी हुई चाय की ख़ामोशी
हाथ हिलता ज़िम्मेदारियों का शोर

कुछ नहीं सुना
बस चली गयी 

4.5.16

कविता हो मेरी

झिलमिल टिमटिम करती रहना
कविता हो मेरी सजती रहना
इंशा तुम सच में सबसे जुदा हो
इस झूठ का सच किसी से न कहना 


शहर को ये गुमाँ है
कि वो गांवों से महान है
सब जान के अनजान हैं
खिड़कियाँ बंद हैं तो आराम है

तू खिड़की खोल के टोकती रहना
कविता हो मेरी सजती रहना

सूरज भी चाँद से कितना ख़फ़ा है
धूप है बूढ़ी चांदनी क्यूँ जवां है
सच है भद्दा दाग़ लगा है
उल्टा तवा तू घिसती क्या है

उम्मीद की रोटी सेंकती रहना
कविता हो मेरी सजती रहना 

तीन अंतरे और एक मुखड़ा है
अंतरे में अंतरमन छुप्पा है
मुखड़ा शायद ही याद है
इन्हें सिर्फ़ देह की आस है 

तू इनको आस-पास न अपने सहना
कविता हो मेरी सजती रहना


इंशा तुम सच में सबसे जुदा हो 
इस झूठ का सच किसी से न कहना 
झिलमिल टिमटिम करती रहना
कविता हो मेरी सजती रहना...






कैफ़ी साहब


कौन हुक्मरान है कौन शहज़ादा

ज़िंदा हैं आशिक़ पता तो चले

उनका जन्मदिन है आज

मज़ार के कबूतरों को पता तो चले

अमल



लेने मेरे अमल का इम्तिहान चला 

दिया बाती से होड़ करने चला 

उजाला कहाँ किसकी सुनता है 

जहाँ बही रोशनाई वहाँ चला

पेशानी



पेशानी पे अपना 
दिल रख आया हूँ 


आज फिर उसे 
सोता छोड़ आया हूँ


29.6.15

Jazzy (2005 - 2015)


I lost my dearest साली.
भौंकती थी, कभी दी नहीं उसने गाली.
दिल का दौरा आया आज... तब भी नहीं बोली.
के जीजू! खेल ख़त्म, बजाओ ताली.